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मैं साहसी कैसे बनूं

साहसी बनने के लिए आत्मविश्वास और धैर्य विकसित करना महत्वपूर्ण है। यहां कुछ कदम हैं जो आपको साहसी बनने में मदद कर सकते हैं: 1. डर का सामना करें:  अपने डर को पहचानें और धीरे-धीरे उनका सामना करने का प्रयास करें। छोटा कदम उठाकर शुरुआत करें और जैसे-जैसे आत्मविश्वास बढ़े, बड़े कदम उठाएं। 2. खुद पर विश्वास रखें:  साहस का आधार आत्म-विश्वास होता है। खुद पर विश्वास रखने से आप मुश्किल समय में भी डटे रह सकते हैं। 3. नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण:  नकारात्मक सोच को चुनौती दें और सकारात्मक सोच विकसित करें। ऐसा करने से आप किसी भी स्थिति में अपने डर को कम कर सकते हैं। 4. अनुभव से सीखें:  साहसी बनने के लिए नए अनुभवों का सामना करना आवश्यक है। हर अनुभव आपको कुछ सिखाएगा और आपका साहस बढ़ाएगा। 5. लक्ष्य निर्धारित करें:  अपने जीवन के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाएं और उन्हें पाने के लिए मेहनत करें। जैसे-जैसे आप अपने लक्ष्य प्राप्त करेंगे, आपका आत्मविश्वास और साहस बढ़ता जाएगा। 6. खुद को प्रेरित करें:  साहसी बनने के लिए प्रेरणादायक कहानियाँ पढ़ें या ऐसे लोगों के साथ समय बिताएं जो आपको प...

खुद से प्यार कैसे करें

खुद से प्यार करने का मतलब है कि आप खुद को पूरी तरह स्वीकार करें, अपनी कमजोरियों और अच्छाइयों के साथ। यह आत्म-सम्मान और आत्म-स्वीकृति का अभ्यास है। यहां कुछ तरीके हैं जिनसे आप खुद से प्यार करना शुरू कर सकते हैं: 1. अपनी गलतियों को स्वीकारें और उनसे सीखें:  हर इंसान गलतियां करता है, लेकिन उनसे सीखना और आगे बढ़ना ही जीवन का हिस्सा है। खुद को हर गलती के लिए दोषी ठहराना छोड़ दें। 2. अपनी खूबियों पर ध्यान दें:  अपनी सकारात्मक बातों को पहचानें। अपने गुण, कौशल, और जीवन में जो आपने हासिल किया है, उन पर गर्व करें। 3. सेल्फ-केयर की आदत डालें:  अपने शरीर और मन का ख्याल रखें। चाहे वो शारीरिक एक्सरसाइज हो, सही खान-पान हो, या फिर मानसिक शांति के लिए मेडिटेशन। 4. नेगेटिव आत्म-चर्चा को बदलें:  अगर आप खुद से हमेशा नेगेटिव बातें करते हैं, जैसे "मैं अच्छा नहीं हूं" या "मैं कुछ नहीं कर सकता," तो इसे बदलकर कहें, "मैं सीख रहा हूं" या "मैंने आज अपनी पूरी कोशिश की।" 5. स्वयं के लिए समय निकालें:  हर दिन कुछ समय अपने लिए निकालें। वो चीजें करें जिनसे आपको खुशी मिलती है, चाह...

मौलिक अधिकार नहीं है मस्जिदों पर लाउडस्पीकर लगाना

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बिना एफ आई आर किसी भी व्यक्ति को थाने पर नहीं बुला सकते

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देश में तत्काल लागू हो वन नेशन वन राशन कार्ड

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योजना पहले ही शुरू हो चुकी है और कई राज्यों में लागू भी है। 29 अप्रैल 2020 को दैनिक जागरण मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित

प्रदेश के सभी बोर्डों के निजी स्कूल नहीं बढ़ा सकेंगे फीस

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28 अप्रैल 2020 दैनिक जागरण की खबर

स्वयं की तुलना किसी से मत करो

किसी व्यक्ति से स्वयं की तुलना करना स्वयं के हृदय पर आघात करने जैसा है ।  अतः कभी भी किसी को देख कर उससे अपनी तुलना नहीं करनी चाहिए , चाहे वह आप से श्रेष्ठ हो या हीन हो । अपने आपमें हमेशा यह महसूस करना चाहिए कि हम जैसे भी हैं एकदम परफेक्ट है ।  अपने आप को हमेशा सुबह - शाम - दोपहर , सुबह उठते समय , रात को सोते समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाले,  मनोबल बढ़ाने वाले , उर्जा बढ़ाने वाले विचारों से स्नान कराते रहना चाहिए और एक बात किसी भी प्रकार का संकोच पुरुषों को शोभा नहीं देता , अतः इसका त्याग करो।

खुद से करें सकारात्मक बातें

हम सभी को दो आवाजें सुनाई देती हैं एक जो खुद के अंदर से आती है और दूसरी जो बाहरी व्यक्ति आपके बारे में कहते हैं ।  यदि बाहरी व्यक्ति की आवाज आप को अपेक्षाकृत तेज सुनाई दे रही है , तो समझ जाइए कि आपका खुद पर भरोसा कम है ।  सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमेशा खुद से सकारात्मक बातें करते रहना चाहिए।  यदि खुद से नकारात्मक बातें करेंगे जैसे ;  मैं टाइम पर काम नहीं कर पाता ! मैं सुबह जल्दी नहीं उठ पाता हूं ! या मैं आलसी हूं ! तो यह खुद के आत्मविश्वास पर असर डालेगा । जिसके कारण जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। खुद को प्रोत्साहित करने की आदत भी डालें। इस बात का यकीन रखें कि आपमें , अपनी पसंद का काम करने की बहुत ही क्षमता है ।

काम के दबाव से कैसे बचें

      मेंरे  मित्र कुमार आनंद एक बैंक में क्लर्क हैं। वो कहते हैं कि उनके साथ काम करने वाले कई साथी कर्मचारी ऐसे हैं जो अपना काम बड़े ही शांत ढंग से करते हैं जबकि कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं जो काम का दबाव थोडा सा भी बढने पर सबसे अजीब रूखा व्यवहार करते हैं। दोस्तों !  काम का दायरा बढने पर मानसिक दबाव का होना तो स्वाभाविक है। लेकिन इस दबाव का बढ़ना या कम होना हमारी कार्यशैली पर निर्भर करती है।  हम इस प्रकार के दबाव की स्थिति से निपट सकते हैं ……… जीवन में संतुलन होना है जरूरी : अपने पारिवारिक जीवन और कामकाजी जीवन के बीच एक संतुलन बनाऐ रखने का प्रयास करना चाहिऐ। जिस प्रकार कार्यस्थल पर अपने काम का महत्व देते हैं उसी प्रकार घर पर परिवार के साथ भी समय गुजारना भी महत्वपूर्ण है। ऐसा न हो कि आप कामकाज के दबाव के कारण अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह हो जाऐं। इन दोनों के बीच संतुलन न होने के कारण व्यक्ति का  stress और भी बढ जाता है। समस्या का समाधान करना : कभी न कभी कार्यस्थल पर ऐसी स्थितियां आ जाती हैं  जिससे काम का बोझ बहुत अ...

एमडीटी खाओ - कुष्ठ भगाओ

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आज हमारे दैनिक समाचार पत्र के साथ-साथ एक सरकारी विज्ञापन का पन्ना भी मिला । जोकि राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम बलिया से संबंधित था । मुझे लगा कि आप लोगों के साथ इसे अपने इस पेज पर साझा करना चाहिए । कुष्ठ रोग क्या है ? • यह एक जीवाणु  माइकोबैक्टेरियम लैप्री  द्वारा फैलता है । • यह वंशानुगत तथा पिछले जन्म के पापों का प्रतिफल नहीं है । • कुष्ठ रोग 98% संक्रमित रोगियों के खांसने व छींकने से निकलने वाले कीटाणुओं के नए व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने से फैलता है । • कुष्ठ रोग मात्र 2% संक्रमित रोगी के साथ लंबे समय तक त्वचा के संपर्क एवं संसर्ग में रहने पर फैलता है। कुष्ठ रोग के लक्षण •   शरीर पर शरीर के रंग से हल्के रंग , लाल रंग अथवा पूर्ण रूप से सुन कोई दाग धब्बा अथवा चकता पाया जाना। •  कोहनी के पीछे अथवा घुटने के पीछे वाली नस का मोटा होना अथवा मोटे होने के साथ-साथ दर्द होना। • हाथों अथवा पैरों की मांसपेशियों में अचानक कमजोरी होना। कुष्ठ रोग का उपचार • कुष्ठ रोग साध्य है , उपचार के बाद पूर्णतया ठीक हो जाता ह...

चाणक्य के अनमोल वचन

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नमस्कार दोस्तों !! चाणक्य , चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन  में प्रधानमन्त्री थे। इनके कारण ही चन्द्रगुप्त मौर्य मगध की गद्दी को जीतने में सफल हुऐ थे। आईये जानते हैं उनके कुछ अनमोल विचार…… 1•  " सबसे बड़ा गुरु मंत्र ,  अपने राज किसी को भी मत बताओ। ये तुम्हे खत्म कर देगा। " 2•   " आदमी अपने जन्म से नहीं अपने कर्मों से महान होता है।" 3• "  पुस्तकें एक मुर्ख आदमी के लिए वैसे ही हैं , जैसे एक अंधे के लिए आइना।" 4•  "  शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।  " 5• "  आलसी का ना वर्तमान होता है ,  ना भविष्य। " 6•  " कठोर वाणी अग्नि दाह से भी अधिक तीव्र दुःख पहुँचाती है। " 7•   " अपने से अधिक शक्तिशाली और समान बल वाले से शत्रुता ना करें। " 8•  "   जिसकी आत्मा संयमित होती है ,   वही आत्मविजयी होता है। " 9•  "  धूर्त  व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं। " 10•  "   दंड का भय ना होने से लोग अकार्य करने लगते हैं। ...

महात्मा बुद्ध द्वारा कहा गया उपदेश

अपने पुत्र और पत्नी  को छोड़कर युवावस्था में ही सन्यास लेने वाले सिद्धार्थ , बुद्धत्व को प्राप्त करने के पश्चात् महात्मा बुद्ध कहलाये | महात्मा बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की | आज बौद्ध धर्म दुनिया के चार बड़े धर्मों में से एक है |  दोस्तों !! महात्मा बुद्ध के ऐसे उपदेश , जिन्हे अपने जीवन में अपनाने से शांति , ऊर्जा और प्रेरणा मिलती है आपसे इस लेख के माध्यम से साझा कर रहा हूँ |  1 .   हजारों लड़ाइयाँ जीतने से अच्छा है आप अपने आप पर विजय प्राप्त करो | फिर हमेशा जीत आपकी ही होगी |  [ You Win Over Yourself Is Better Than Thousands Of Battles. Then You Will Always Win . ] 2 .   बुराई से बुराई को कभी ख़त्म  नहीं किया जा सकता !  बुराई हमेशा प्रेम को समाप्त कर  देती है |  [  Evil Can Never Be Eliminated From Evil ! Evil Always Endures love .]  3 .  क्रोधित होने का मतलब है , जलता हुवा कोयला किसी दूसरे पर फेंकना |  जो सबसे पहले आप को ही जलता है |  [ Being Angry Means , Th...

गिरिराज सिंह जी ऐसी फैक्ट्री लगाएंगे जिसमें से केवल बछिया ही पैदा होगी , बछड़ा नहीं होगा

अक्सर अपने ध्यानाकर्षित बयानों के चलते सुर्ख़ियों में रहने वाले गिरिराज सिंह जी , जो वर्तमान में केंद्रीय पशु पालन मंत्री हैं , उन्होंने एक कार्यक्रम में फिर एक ऐसा ही बया...

सचेत रहें , सुरक्षित रहें - ई सब बकवास है

टीवी वाले समाचार में दिखा रहा था जिसमे एक महिला सुबह सुबह सड़क किनारे टहल रही है और एक बहुते लम्बा तरकुल का पेंड ठीक उसके ऊपर गिरता है , और उ खतम । हाल ही में आचार्य श्री बालाकृ...

आज के इस काल में , काल के कपाल में , अगड़ा कौन , है पिछड़ा कौन

“ आज के इस काल में , काल के कपाल में अगड़ा कौन , है पिछड़ा कौन हम तो हैं भारत मां की संतान क्या है कोई  इससे अनजान ? टटोल जरा सा अपने मन को  फिर क्यों डोल रहा है इंसान स्वार्थ के झूठे लालच में और जाति-धर्म के आंचल में क्यूं कर रहा सब का नुकसान अरे सावधान ! इन चोरों से , बेईमानों से ,  इस राष्ट्र के गद्दारों से  बतला रहे , जो भों-भों से  अगड़ा कौन , है पिछड़ा कौन ।। ”

पास बैठो की दिल के अरमान अभी बाकी है

“ पास बैठो की दिल के अरमान अभी बाकी है मेरे ग्लास में , तेरे हिस्से की शराब अभी बाकी है लोटे बिन पेंदी के , हवा का रुख भांफ जाते हैं ले देख मेरी आंखों में , तेरे इश्क की आस अभी बाकी है मेरे दोस्त कहते हैं , बड़ा बावला हूं मैं इश्क की राहों में जरा-सा सावला हूं अरे ! बीमार करके मुझे , कहां सुकूं पाओगे जरा ठहरो ! इस बीमारी का इलाज अभी बाकी है ।। ”

न जाने कितनों में चुनकर लाई थी तुझे

एक दिन टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे , उसमें एक बहु अपने बुड्ढी सास को पीट रही थी । यह घटना कैमरे में कैद हो गई थी ।  पता नहीं इसको देख कर के हमारा मन बड़ा ही व्याकुल हो गया , मैं वहां से उठा तो अनायास ही ये पंक्तियां बनने लगी .... “ न जाने कितनों में चुनकर लाई थी तुझे , बड़ी ही धूमधाम से घर की बहू बनाई थी तुझे । तेरी आंखों में , तेरी मां का प्यार देखा था मेरी आंखें धूमिल का हुई , पल भर में बुढ़िया बनाई मुझे ।। जो हस्र आज मेरी है ,  याद रख ! कल भी तेरी होगी  तेरे आंखों के सामने भी रात अंधेरी होगी चिराग घर में मेरे , जो है जल रहा न आज मेरी है , न कल तेरी होगी ।। ”

मत कर माटी मन के आपन , सोझे बा तारापथ

है कोई मांई का लाल ? जिसका कबहूं  निराशा नाम के शैतान से  सामना ना हुआ हो ! है कोई ? हमसे तो भईया  ई ससुरा हमेशा मितला रहता है । मैं आज यहां यह लिख पा रहा हूं ! इस बात का प्रमाण है कि यह कभी मुझ पर हावी नहीं हो पाया है। जी हां ! मैं अभी जिन्दा हूं। बहरहाल ! हमने कुछ पंक्तियां लिखने की गुस्ताखी कर दी है जो कुछ इस तरह से है “ मत कर माटी मन के आपन सोझे बा तारापथ , पकड़ ल अोके ! तनिक - सा उबाल मनोबल मिल जाई उ हर मंजिल ,जब लेबा मन  ठानी भरल बा क्षमता तोहरा में , ल ओके पहिचान ।।”

जोगा बाबा के कीर्तन में

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सफलता का रास्ता ( Way Of Success )

" एक विचार लो । उसी को अपना जीवन बनाओ। उसी को सोचो , उसी का स्वप्न देखो और उसी पर अवलम्बित रहो। अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , स्नायुओं और शरीर के प्रत्येक भाग को उसी विचार से ओत-प्रोत होने दो और दूसरे सब विचारों को अपने से दूर रखो । यही सफलता का रास्ता है। "    ~ स्वामी विवेकानंद