न जाने कितनों में चुनकर लाई थी तुझे
एक दिन टीवी पर न्यूज़ देख रहे थे , उसमें एक बहु अपने बुड्ढी सास को पीट रही थी । यह घटना कैमरे में कैद हो गई थी । पता नहीं इसको देख कर के हमारा मन बड़ा ही व्याकुल हो गया , मैं वहां से उठा तो अनायास ही ये पंक्तियां बनने लगी ....
“ न जाने कितनों में चुनकर लाई थी तुझे ,
बड़ी ही धूमधाम से घर की बहू बनाई थी तुझे ।
तेरी आंखों में , तेरी मां का प्यार देखा था
मेरी आंखें धूमिल का हुई , पल भर में बुढ़िया बनाई मुझे ।।
जो हस्र आज मेरी है ,
याद रख ! कल भी तेरी होगी
तेरे आंखों के सामने भी रात अंधेरी होगी
चिराग घर में मेरे , जो है जल रहा
न आज मेरी है , न कल तेरी होगी ।। ”
“ न जाने कितनों में चुनकर लाई थी तुझे ,
बड़ी ही धूमधाम से घर की बहू बनाई थी तुझे ।
तेरी आंखों में , तेरी मां का प्यार देखा था
मेरी आंखें धूमिल का हुई , पल भर में बुढ़िया बनाई मुझे ।।
जो हस्र आज मेरी है ,
याद रख ! कल भी तेरी होगी
तेरे आंखों के सामने भी रात अंधेरी होगी
चिराग घर में मेरे , जो है जल रहा
न आज मेरी है , न कल तेरी होगी ।। ”
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