पास बैठो की दिल के अरमान अभी बाकी है
“ पास बैठो की दिल के अरमान अभी बाकी है
मेरे ग्लास में , तेरे हिस्से की शराब अभी बाकी है
लोटे बिन पेंदी के , हवा का रुख भांफ जाते हैं
ले देख मेरी आंखों में , तेरे इश्क की आस अभी बाकी है
मेरे दोस्त कहते हैं , बड़ा बावला हूं मैं
इश्क की राहों में जरा-सा सावला हूं
अरे ! बीमार करके मुझे , कहां सुकूं पाओगे
जरा ठहरो ! इस बीमारी का इलाज अभी बाकी है ।। ”
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